उत्तराखंड

पांच जिलों में यूपी की वोटर लिस्ट से होगा मिलान, दो जगह नाम मिला तो एक ही जगह रहेगा वोट।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतिम चरण में उत्तराखंड के पांच जिलों में मतदाता सूची का उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट से मिलान शुरू हो गया है। निर्वाचन आयोग ने डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री (डीएसई) और फोटोग्राफिक सिमिलर एंट्री (पीएसई) के माध्यम से ऐसे मतदाताओं की पहचान और सत्यापन शुरू किया है, जिनके नाम दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। यह अभियान देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में चलाया जा रहा है।

इस प्रक्रिया के तहत पहले मतदाताओं के नाम, उम्र, लिंग, अभिभावक के नाम और फोटो समेत उपलब्ध विवरण का मिलान किया जाएगा। इसके बाद संबंधित मतदाताओं का बूथ स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा। बीएलओ एप में इसके लिए अलग सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बीएलओ अपने बूथ के उन मतदाताओं की जानकारी देख सकेंगे, जिनकी प्रविष्टि उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में भी मिली है।

बीएलओ संबंधित मतदाता के घर जाकर उसे दोनों जगह नाम दर्ज होने की जानकारी देंगे। मतदाता से पूछा जाएगा कि वह अपना नाम किस राज्य की मतदाता सूची में रखना चाहता है। यदि वह उत्तराखंड की सूची में नाम रखना चाहता है तो यहां उसकी प्रविष्टि का सत्यापन किया जाएगा। वहीं, उत्तराखंड की सूची से नाम हटाने की इच्छा होने पर संबंधित मतदाता से फार्म-7 भरवाया जाएगा।

यदि मतदाता उत्तराखंड की मतदाता सूची में अपना नाम रखना चाहता है और उसका नाम उत्तर प्रदेश की सूची में भी दर्ज है, तो यहां के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से उत्तर प्रदेश के संबंधित ईआरओ को पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद वहां की मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से डीएसई और पीएसई के लिए मॉड्यूल उपलब्ध कराया गया है। इसके बाद पांच जिलों में अभियान शुरू कर दिया गया है। बीएलओ एप के माध्यम से मिलने वाली जानकारी के आधार पर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है।

उत्तराखंड के इन पांच जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं, जिनका संबंध उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से रहा है। रोजगार, कारोबार और अन्य कारणों से दोनों राज्यों में रहने वाले लोगों के नाम दोनों स्थानों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने की स्थिति सामने आती रही है। इसी को देखते हुए एसआईआर के अंतिम चरण में दोनों राज्यों की सूचियों का मिलान कराया जा रहा है।

निर्वाचन विभाग का उद्देश्य दोहरी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान कर यह सुनिश्चित करना है कि एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थान की मतदाता सूची में दर्ज न रहे। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर एसआईआर-2026 से संबंधित मतदाता सूची और अन्य सूचनाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

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