अंतरराष्ट्रीय

हम यूरोपियन देशों के दबाव में अपने बच्चों को भिखारी तो नहीं बना रहे?

क्या अमेरिका और युरोपियन देशों के मानवाधिकार प्रतिबंधों के चलते हम अपने देश के बच्चों को भिखारी नहीं बना रहे❓

यह यक्ष प्रश्न है। दोनों तरफ के तर्कों में दम है। अगर हम बच्चों को काम पर लगा देंगे तो उनका बचपना ही खत्म हो जाएगा। न पढ़ लिख पाएंगे, न जीवन के आरंभिक मानसिक तनाव रहित क्षणों का लुत्फ उठा पाएंगे। अतः आज तक मैं भी बहुत जोर शोर से चाइल्ड लेबर के खिलाफ था। पर परसों मेरे सामने एक ऐसा केस आया कि मेरा माथा घूम गया।

हुआ यूं कि मेरे पास एक लड़का आया। उम्र देखने मे 20- 25 वर्ष लग रही थी। बोला साहिब काम पर रख लो। मैने कहा मैं तो तुम्हें जनता नहीं। वह बोला साहिब मेरी माँ तो कई वर्ष पहले ही मर गयी थी अब पिछले महीने पिता भी मर गए। घर में मेरी दादी और में ही रह गए हैं अतः मुझे नोकरी की अति शीघ्र जरूरत है।

मैंने कहा तुम अपना आधार कार्ड ले कर आ जाना में देखता हूँ मैं क्या कर सकता हूँ।

वो रोने लगा। बोला आप कम तनख्वाह दे देना मेरे पास आधार कार्ड नहीं है।

मैने जब असमर्थता जताई तो अगले दिन वो आधार कार्ड ले कर आ गया जिसमें उसका बर्थ ईयर 2004 लिखा था, यानी अभी 17 वर्ष का ही था। मैने कहा तुम अभी छोटे हो मैं तुम्हे काम पर नहीं रख सकता तो वो रोने लगा। मैंने तरस खाकर उसे 500 रुपये देने चाहे तो बड़ी शालीनता से बोला कि आप मुझे भिखारी बनाना चाहते हो।

दो मिनट में ही उसने मुझे निशब्द कर दिया और इस बाल श्रम कानून की कमियों को उजागर कर दिया।

अब सोच रहा हूँ इस मुद्दे को किस प्लेटफॉर्म पर उठाऊं।

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