हिमाचल प्रदेश

बेटी की एडमिशन करवाने को अपने खर्चे पर गया था लंदन, बोले, BJP के पास मुद्दे नहीं, इसलिए हो रहे निजी हमले

मुख्यमंत्री सुक्खू बोले, भाजपा के पास मुद्दे नहीं, इसलिए हो रहे निजी हमले

स्वास्थ्य मंत्री के विदेश दौरे का विवाद बेवजह, अभी नहीं दी थी मंजूरी

कांगड़ा बैंक ओटीएस स्कीम हमारी सरकार की नहीं, बीओडी भंग की

शिमला

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वह अपने निजी दौरे पर लंदन गए थे, क्योंकि बेटी ने एडमिशन के लिए साथ चलने को कहा था। वह मुख्यमंत्री के साथ-साथ एक पिता भी हैं। यह उनका निजी दौरा था, बावजूद इसके विपक्ष ने इस पर भी राजनीति की। उन्होंने इस निजी दौरे पर एक भी सरकारी रुपया ख़र्च नहीं किया है। मुख्यमंत्री अपने सरकारी निवास ओक ओवर में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। स्वास्थ्य मंत्री डा. धनीराम शांडिल के विदेश दौरे को लेकर हो रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि जिस अधिसूचना को लेकर विवाद हो रहा है, उसमें किसी अधिकारी के हस्ताक्षर भी नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी अनुमति के बिना किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं जाया जा सकता। उन्होंने इसकी मंजूरी नहीं दी थी। वैसे भी इस तरह के दौरे किसी प्रोजेक्ट के अधीन होते हैं, जिसमें फंडिंग एजेंसी का पैसा होता है। राज्य सरकार का पैसा इसमें नहीं लगता।

बिहार की एक जनसभा में सीमेंट टैक्स को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीमेंट पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाया। विपक्ष बेवजह की राजनीति कर रहा है। इसका एक अर्थ यह भी है कि भाजपा के पास उनकी सरकार के खिलाफ मुद्दे नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी का सबसे बड़ा नुकसान हिमाचल प्रदेश को हुआ है। अन्य छोटे राज्यों ने भी जीएसटी से हो रहे नुकसान की बात केंद्र सरकार के सामने रखी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1500 करोड़ रुपए का जो विशेष पैकेज घोषित किया था, वह हिमाचल को कब मिलेगा? उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश आपदा से जूझ रहा है और राज्य में को अभी पैसों की ज़रूरत है। जब दर्द में राहत न मिले तो सालों बाद राहत का कोई फायदा नहीं है।

पीएम मोदी तो हिमाचल आ कर चले गए, लेकिन 1500 करोड़ का कोई पता नहीं है। केसीसी बैंक के मामले को लेकर कहा कि बैंक की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी हमारी सरकार की नहीं थी। इसकी मंजूरी आरबीआई द्वारा दी जाती है। इसमें प्रदेश सरकार का कोई लेना-देना नहीं होता। ईडी इस केस की जांच कर रही है और उम्मीद है सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि पिछले पांच-सात साल से इस बैंक में बहुत गड़बड़ चल रही थी और जानकारी मिलने के बाद उन्होंने निदेशक मंडल को भंग कर दिया है।

एचआरटीसी-पर्यटन निगम की परेशानी भाजपा की देन

आने वाले चार से पांच महीने तक हिमाचल पर्यटन विकास निगम कर्मियों और एचआरटीसी के पेंशनरों के भुगतान में देरी हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए पूर्व भाजपा सरकार के कामों को जिम्मेदार ठहराया। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों को वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों को वक्त पर पेंशन देने के लिए प्रतिबद्ध है। संभव है कि कुछ महीनों तक परेशानी हो, लेकिन इसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है।

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