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होली, काफिरों का त्योहार…मत मनाओ’: जामिया में कट्टरपंथियों ने लगाए ‘अल्लाह-हू-अकबर’के नारे; कहां हैं गंगा-जमुनी तहजीब और संविधान का रोना रोने वाले?

SG

जामिया में होली मनाने पर कट्टरपंथियों का बवाल
कहीं किसी मुसलमान के विरुद्ध कोई अप्रिय घटना होने पर ‘गंगा-जमुनी तहजीब’, ‘डरा हुआ मुसलमान’, ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ और ‘संविधान का रोना रोने’ वाला गैंग जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में होली न मनाने पर कट्टरपंथी जेहादी तत्वों द्वारा बवाल करने पर क्यों चुप हैं? जब भी हिन्दुओं के विरोध में उठने वाली आवाज़ों पर ये गैंग किस कारण से चुप्पी साध लेता है? इसकी गंभीरता से जाँच जरुरी है, क्योकि बिना किसी नेता अथवा संगठन के समर्थन के बिना कोई ऐसी हरकत नहीं कर सकता। दिल्ली और केंद्र सरकार को इन तत्वों को गिरफ्तार कर इन्हें उकसाने वाले संगठनों के नाम मालूम कर कार्यवाही करनी चाहिए।   

केंद्र सरकार के अधीन आने वाले दिल्ली की प्रमुख यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Milia Islamia University) में छात्रों द्वारा होली खेलने पर जमकर बवाल काटा गया। इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के भड़काऊ नारे लगाए गए।जामिया यूनिवर्सिटी के जामिया नगर स्थित परिसर के कई वीडियो सामने आए हैं। पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा द्वारा शेयर की गई एक वीडियो में कुछ लोग अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। वहीं, वीडियो में सुनाई दे रहा है कि ‘रंग लगाते हो तुम लोग, शर्म नहीं आती’। इस दौरान हिंदुओं को त्योहार मानने से रोका गया।

दरअसल, होली से पहले जामिया में ‘रंगोत्सव’ नाम से बुधवार (1 मार्च 2023) को होली मिलन का कार्यक्रम रखा गया था। इसका आयोजन गेट नंबर 13 के पास अंसारी ऑडिटोरियम के पास किया गया था। इस दौरान विद्यार्थियों को भड़काऊ नारे लगाकर होली खेलने से मना किया गया।

स्वाति गोयल ने एक अन्य ट्वीट में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा कैंपस में होली ना मनाने देने की अपील करते हुए कई पोस्ट लिखी गई है। पोस्ट में होली को काफिरों का त्योहार कहा गया है। इसमें हदीस का भी उदाहरण दिया गया है।

ऐसे ही एक अन्य वीडियो में कुछ असामाजिक तत्व होली खेलने वालों को लेकर हंगामा कर रहे हैं। इसके साथ ही कैंपस में इसकी अनुमति देने पर जामिया प्रशासन को भी हिजड़ा कह दिया। वीडियो में इन तत्वों को हंगामा करते देखा जा सकता है।

होली भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है, जिसमें लोग अपने प्रेम और भाईचारा को प्रदर्शित करते हैं और एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। इसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है। रंग का धर्म से ताल्लुक हो भी नहीं सकता, लेकिन कट्टरपंथी तत्व गैर-इस्लामी बताकर हंगामा करते नजर आए।

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