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किसान प्रदर्शनकारियों को 25 मस्जिदों से पहुंचाया जा रहा भोजन, दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भी भड़काया था इस संगठन ने

UAH का संस्थापक खालिद सैफी (बाएँ) CAA विरोधी दंगों में सक्रिय था

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कहते हैं चोर अपने क़दमों के निशान छोड़ ही जाता है, वही बात किसान आन्दोलन में भी नज़र आ रही है। कांग्रेस शासित राज्य से निकले किसान का चोला ओढ़े उपद्रवियों की असलियत समय से पूर्व ही उजागर हो गयी। अपनी ज़िंदगी में अनगिनत धरने और प्रदर्शन देखे, लेकिन 2020 में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में और अब हो रहे किसानों के नाम पर उपद्रवियों के आन्दोलन जिस तरह हिन्दू, हिन्दुत्व विरोधी, योगी और मोदी विरोधी नारेबाजी देखने को मिल रही है, किसी अन्य धरने अथवा प्रदर्शन में देखने अथवा सुनने को नहीं मिला।

दूसरे, नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में बने शाहीन बाग़ में ओवैसी की पार्टी के दिल्ली पदाधिकारी डी एस बिंद्रा ने फ्लैट बेचकर लंगर लगाकर खूब वाहवाही लूटी, लेकिन वो भांडा भी बहुत जल्दी फूट गया। पार्टी फण्ड से ख़रीदा गया था फ्लैट। उसी तर्ज पर किसानों के नाम हो रहे प्रदर्शन में खाने का प्रबंध भी अराजक ही कर रहे हैं, और इस काम में मस्जिदों का भी इस्तेमाल हो रहा है। पंजाब और पंजाब से बाहर सिख समुदाय को इस षड़यंत्र को समझ सिख प्रदर्शनकारियों को सचेत करना होगा। शंका है, कहीं अराजक तत्व इन्हें उकसा कर किसी हिंसक घटना को अंजाम दिलवा कर हिन्दू-सिख दंगा करवाकर अपना उल्लू सीधा करने का प्रयत्न करेंगे। क्योंकि प्रदर्शनकारी जिस तरह के उत्तेजक नारेबाजी कर रहे हैं, वह अच्छे चिन्ह नहीं दिखाई पड़ते। उससे हिन्दू और सिख दोनों ही समुदायों को एकजुट रहकर किसी भी अनहोनी को पैरों तले मसलना होगा। 

 

इन प्रदर्शनकारियों को इनके आयोजकों और समर्थकों ने अच्छी तरह हर पहलू से सचेत करवाकर दिल्ली भेजा है। जिस तरह की नारेबाजी हो रही है, उसका इस प्रदर्शन के आयोजक और समर्थकों को जवाब देना होगा।   

पंजाब में कथित किसान आंदोलन को लेकर देश भर में बहस चल रही है। खालिस्तानी संगठनों के साथ-साथ ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH)’ संगठन के भी इसमें शामिल होने और इसे समर्थन देने के आरोप हैं। ये वही इस्लामी संगठन है, जिस पर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में शामिल होने के भी आरोप हैं। UAH ने किसान आंदोलनकारियों को भोजन व अन्य चीजें पहुँचाने का जिम्मा उठा रखा है।

 

UAH की पूरी कोशिश है कि दिल्ली पहुँचे ‘किसान’ आंदोलनकारी ज्यादा से ज्यादा दिनों तक यहाँ रहें और लंबे समय तक हंगामा करें। इसलिए, उसने दिल्ली की 25 मस्जिदों के साथ मिल कर आंदोलनकारियों को न सिर्फ खाने-पीने की चीजें, बल्कि रहने के लिए जगह भी मुहैया कराने का जिम्मा उठा लिया है। UAH के मुखिया नदीम खान ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों को मदद पहुँचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 4 किचन पूरे 24 घंटे चलाए जा रहे हैं, ताकि आंदोलनकारियों को भोजन मुहैया कराया जा सके। हौज खास, रोहतक, ओखला और ओल्ड दिल्ली में ये किचन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन 4 जगहों के अलावा आंदोलनकारियों को उनकी माँग के हिसाब से पार्सल भी पहुँचाए जा रहे हैं। गाड़ियों का इस्तेमाल कर भोजन पैकेट्स आंदोलनकारियों तक पहुँचाया जा रहा है।

 

 

UAH की स्थापना खालिद सैफी ने की थी। वो एक इस्लामी कट्टरपंथी है, जिस पर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काने के आरोप हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में इस दंगे पर बोलते हुए इस संगठन का नाम लिया था। उन्होंने कहा था कि कैसे UAH ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से पहले सड़कों को जाम करने की बात की थी। उसे गिरफ्तार कर उस पर UAPA भी लगाया गया था।

सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी वायरल हुई थीं, जिसमें खालिद सैफी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, रवीश कुमार से लेकर JNU के छात्र नेता कन्हैया कुमार के साथ देखा गया था। इनमें खालिद सैफी को वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की आरफा खानम, धान को गेहूँ बताने वाले यूट्यूबर अभिसार शर्मा, राजदीप सरदेसाई और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ देखा गया था।

UAH का एक व्हाट्सप्प ग्रुप भी था, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों और विदेश से फंड्स पाने वाले NGO के साथ संबंधों के बारे में पता चला था। इस ग्रुप के एक स्क्रीनशॉट में निकिता चतुर्वेदी नाम की एक महिला ‘खालिद भाई, उमर और नदीम भाई’ का नाम लेती हैं, जिसके जवाब में लिखा जाता है कि ये तीनों प्रदर्शन में आ रहे हैं। निकिता फिर लिखती हैं कि लोग आपका इंतजार कर रहे हैं। अब दिल्ली दंगों का आरोपित संगठन UAH ‘किसान’ आंदोलन को हवा दे रहा है।

यही नदीम खान अब आंदोलनकारियों के लिए सारी व्यवस्थाएँ कर रहा है। CAA विरोधी उपद्रव के दौरान UAH के एक कार्यक्रम में योगेंद्र यादव और शरजील इमाम जैसे विवादित चेहरों ने लोगों को सम्बोधित किया गया था। अब फिर से वही ‘सिख-मुस्लिम एकता’ की बातें की जा रही है। एक सिख व्यक्ति ने CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों को लंगर खिलाया था, तब भी ये प्रोपेगेंडा चलाया गया था। बाद में पता चला कि वो AIMIM का नेता है।
साभार आरबीएल निगम

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