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बंधुआ मजदूरी के जाल में फंसा राज्य …बेचे जा रहे हैं आदिवासी बच्चें!

SG

टारगेट पर ठाणे, पालघर, नासिक जिला
• २६ बच्चों को कराया गया है मुक्त

 मुंबई
बंधुआ मजदूरी का दंश राज्य में पैâलता जा रहा है। बंधुआ मजदूरी के लिए बच्चों को भी खरीदा जा रहा है। देश की राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय की होते हुए भी राज्य में आदिवासी बच्चों की बिक्री हो रही है। संज्ञान में आया है कि ठाणे, पालघर और नासिक जिले से कई बच्चे बंधुआ मजदूरी के लिए खरीदे जा रहे हैं। कल विधान परिषद में यह मामला गूंजा। आदिवासी कल्याण मंत्री डॉ. विजयकुमार गावित ने कहा कि इस पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक कदम उठाए जाएंगे।
राकांपा के एकनाथ खडसे व रमेश पाटील सहित अन्य सदस्यों ने मुद्दा उठाया कि आदिवासी क्षेत्रों के आश्रम स्कूलों में खाद्यान्न की खरीद की निविदा प्रक्रिया लंबित है। नासिक के इगतपुरी में आदिवासी बच्चों को बंधुआ मजदूरी के लिए बेचा गया है। इस पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है? यदि यह मामला सच है तो यह एक गंभीर मामला है और सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। विपक्ष ने आदिवासी बच्चों की खरीदी बंधुआ मजदूर के तौर पर किए जाने के मामले में सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। इसके जवाब में आदिवासी कल्याण मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने २६ बच्चों को छुड़ाया है, जिनमें से १६ बच्चों को शहापुर आश्रम स्कूल, दो बच्चों को विक्रमगढ़ आश्रम स्कूल, तीन बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया गया है, जबकि एक लड़की की इलाज के दौरान मौत हो गई। मोखाड़ा के दो लड़के चालीसगांव में पत्थर की खदान में काम कर रहे थे। बच्चों को रिहा करा लिया गया है और मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। बंधुआ मजदूरी के लिए बच्चों को खरीदनेवाले दलालों व मालिकों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी एक्ट और बाल श्रम रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। उपसभापति नीलम गोर्‍हे ने मामले को गंभीर बताते हुए इस पर अलग से सदन में चर्चा कराने का सुझाव दिया है।

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