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594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण को केंद्र सरकार की हरी झंडी, अब तेजी से शुरू होगी प्रक्रिया

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मेरठ को प्रयागराज से जोड़ने के लिए प्रस्तावित छह लेन चौड़े और 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गठित रीजनल इम्पावर्ड कमेटी ने मंजूरी दे दी है। दावा किया जा रहा है कि जब यह एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा तो यूपी का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे होगा। यूपी के 12 जिलों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेसवे से राज्य के आर्थिक विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद की जा रही है।
बुधवार को संपन्न हुई यूपीडा के निदेशक मंडल की 75वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने इस बात पर प्रसन्नता जतायी कि गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने क्लियरेंस दे दी है। इससे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया को और तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अब अंतिम दौर में चल रहा है। इस एक्सप्रेसवे का 95 प्रतिशत से अधिक भौतिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया जाना प्रस्तावित है। बैठक में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे परियोजना में चेंज ऑफ स्कोप के तहत कराए जा रहे कार्यों के लिए बोर्ड की मंजूरी ली गई।
निदेशक मंडल को यह भी बताया गया कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना का 45 प्रतिशत से अधिक भौतिक कार्य संपन्न कर लिया गया है। इस एक्सप्रेसेवे के पैकेज-2 के तहत आजमगढ़ में भूमि उपलब्ध कराए जाने से संबंधित कार्यवाही से बोर्ड को अवगत कराया गया। बैठक में अवस्थी ने बताया कि यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर के बुनियादी ढांचे की कार्ययोजना और विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में 400 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।

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