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Rajasthan: पौने चार साल में दो माह होटल से चली गहलोत सरकार, रास चुनाव में होटल व विमान पर तीन करोड़ खर्च

प्रशांत बख्शी/ जयपुर

Rajasthan गहलोत सरकार पौने चार साल के कार्यकाल में दो महीने होटल से चली। इधर राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों को होटल में रखने और जयपुर से उदयपुर के बीच विमान के ग्यारह चक्कर लगाने का खर्च तीन करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जा रहा है।

जयपुर, । राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पौने चार साल के कार्यकाल में दो महीने होटल से चली। कांग्रेस विधायकों के साथ ही गहलोत सरकार का समर्थन कर रहे निर्दलीय और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के विधायक भी होटल में रहे। सीएम और उनके मंत्रियों ने होटल में ही सरकारी दफ्तर चलाया। इस दौरान फाइलों के निस्तारण के साथ ही नीतिगत निर्णय हुए। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे की बगावत के दौरान साल, 2020 में 34 दिन तक गहलोत मंत्रियों व विधायकों के साथ पहले जयपुर और फिर जैसलमेर के रिसार्ट में रहे। फिर जून, 2020 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस और समर्थित विधायक होटल में कैद रहे।

टूट के डर से विधायकों को अरावली रिसार्ट में रखा

 

अब शुक्रवार को राज्यसभा की चार सीटों के लिए होने वाले चुनाव में टूट के डर से विधायकों को एक जून से गुरुवार दोपहर तक उदयपुर के ताज अरावली रिसार्ट में रखा गया। गुरुवार शाम को विधायकों को विमान से उदयपुर से जयपुर लाकर होटल लीला में रखा गया। शुक्रवार को विधायकों को एक साथ मतदान के लिए विधानसभा ले जाया जाएगा। विधायकों को होटल में रखने और जयपुर से उदयपुर के बीच विमान के ग्यारह चक्कर लगाने का खर्च तीन करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जा रहा है। कांग्रेस और भाजपा के विधायकों को मतदान की प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। माक पोलिंग में भाजपा के चार विधायकों ने गलत मतदान किया, जिन्हें फिर समझाया गया।न्यायालय ने राहत दी तो बीटीपी ने चिंता बढ़ाई

 

कांग्रेस को उच्च न्यायालय ने राहत देते हुए बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले छह विधायकों के मतपत्र अलग रखने की याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस पंकज भंडारी ने एडवोकेट हेमंत नाहटा की याचिका पर सुनवाई की। बीटीपी के प्रदेश अध्यक्ष वेलाराम घोघरा ने पार्टी के दोनों विधायकों को व्हिप जारी कर मतदान में शामिल नहीं होने के निर्देश दिए हैं। सीएम अशोक गहलोत ने 126 विधायकों के समर्थन का दावा किया, लेकिन अब यदि दोनों विधायक तटस्थ रहते हैं तो कांग्रेस के पास 124 विधायक ही रह जाएंगे। पार्टी के तीनों उम्मीदवरों की जीत के लिए 123 वोट चाहिए। निर्दलीय सुभाष चंद्रा कांग्रेस के आठ विधायकों के वोट मिलने की बात कह रहे हैं। 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रस के 109, बीटीपी और माकपा के दो-दो एवं 13 निर्दलीय हैं। टूट के डर से गहलोत, मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी ने विधायकों से व्यक्तिगत व सामूहिक बात की। सुरजेवाला ने मीडिया से कहा कि सच, संविधान और लोकतंत्र जीतेगा व झूठ हारेगा।भाजपा विधायक एकजुट

 

भाजपा के 71 विधायक एकजुट हैं। सभी विधायक जयपुर के एक रिसार्ट में रह रहे हैं। योग करने के बाद विधायक दो सत्र में शामिल हुए। चुनाव पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधायकों के साथ संवाद किया। प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह पहले से ही जयपुर में हैं। भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाने के साथ ही निर्दलीय सुभाष चंद्रा का समर्थन किया है। उधर, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) के तीन विधायकों ने जयपुर के जालूपुरा पुलिस थाने में आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी विनय मिश्रा के खिलाफ परिवाद दिया। मिश्रा ने रोलोपा के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल पर निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा से पैसे लेने की बात कही थी।

 

भाजपा विधायक की मुश्किल बढ़ी

 

2016 के एक मामले में भाजपा विधायक चंद्रकांता मेघवाल को गुरुवार को सुबह 11 बजे कोटा के महावीर नगर पुलिस थाने में पेश होना था, लेकिन वह नहीं पहुंची। इससे पहले सात जून को भी वह नहीं गई थी। ऐसे में पुलिस उनकी गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है। मतदान से पहले यदि ऐसा होता है तो भाजपा का एक वोट कम हो जाएगा। इस बीच, मेघवाल ने कोटा जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत याचिका पेश की है।

 

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