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यूपी में पांच कंपनियां चलाएंगी मोबाइल पशु चिकित्सालय, दरवाजे पर पहुंचेगी मोबाइल वेटनरी यूनिट

लखनऊ। मवेशियों का इलाज उनके पास आकर मोबाइल अस्पताल के चिकित्सक करेंगे। इसके लिए पांच कंपनियों के साथ करार किया गया है। पहले चरण में 150 मोबाइल अस्पतालों का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन अभी केवल टीकाकरण ही किया जा रहा है। 2016 में मवेशियों के लिए एंबुलेंस सेवा के बाद अब इस मोबाइल अस्पताल से पशुपालकों को मवेशियों के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर फोन करके अपनी लोकेशन बता कर मोबाइल अस्पताल को अपने घर बुला सकते हैं। एक लाख मवेशियों पर एक मोबाइल पशुचिकित्सालय होगा। पशुचिकित्सालय में चिकित्सक के साथ ही अन्य स्टाफ होंगे जो मवेशियों का पशुपालकों के घर पर ही निश्शुल्क इलाज करेंगे।
प्रदेश में 5.20 करोड़ मवेशीः प्रदेश में 5.20 करोड़ मवेशी हैं। 520 मोबाइल चिकित्सालयों के माध्यम से सभी मवेशियों को इलाज की सुविधा दी जाएगी। पशुपालन विभाग की ओर से सात साल बाद 2019 मेें हुई गणना में देसी गाेवंश में 31.71 लाख की कमी आई है वहीं विदेश नस्ल की गाय के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। वर्ष 2012 में सूबे में विदेशी नस्ल के गोवंश की संख्या 35.79 लाख थी जो 2019 में बढ़कर 61.23 लाख पहुंच गई है। सूबे में दोनों को मिलाकर गोवंश की संख्या 1.90 करोड़ है।
सरकार की पहल पर लखनऊ समेत सभी जिलों में 150 मोबाइल अस्पतालों का संचालन शुरू हो गया है। प्रदेश में कुल 5.20 करोड़ मवेशी हैं और एक लाख की संख्या पर एक मोबाइल चिकित्सालय का लक्ष्य है। पांच कंपनियों को टोल फ्री नंबर के माध्यम से पशुपालकों को सेवाएं दी जाएंगी। अगले साल से संचालन शुरू हो जाएगा।
-डा.एसके अग्रवाल संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग
प्रदेश पर एक नजर
पशु चिकित्सालय- 2,202
पशु औषधालय- 268
पशु सेवा केंद्र-2,575

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