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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा बोले, हरियाणा की बेटियां दिल्ली में मांग रही न्याय

SG

आप नेता अनुराग ढांडा बोले; भाजपा राज में पहले सडक़ पर किसान, अग्निपथ पर जवान और अब जंतर-मंतर पर बैठे पहलवान

चंडीगढ़,  

भारतीय जनता पार्टी के राज में सबसे पहले सडक़ पर किसान, अग्निपथ पर जवान और अब जंतर-मंतर पर पहलवान बैठे हैं। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता और पदाधिकारी खिलाडिय़ों को प्रताडि़त कर रहे हैं। वहीं, सरकार और सिस्टम आरोपियों के साथ खड़े नजर आते हैं। ये बात आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अनुराग ढांडा ने कही। वे शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने बीजेपी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रदेश के पहलवान खिलाडिय़ों और जूनियर कोच मामले में कोई कार्रवाई नहीं होती, तो गृह मंत्री अमित शाह के हरियाणा दौरे का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ खेल मंत्री ने प्रताडऩा की।

दवाब में जांच हो रही है। मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि आरोप अनर्गल हो सकते हैं। अब अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाडिय़ों ने फेडरेशन अध्यक्ष और अन्य कोचों पर ही प्रताडऩा और शोषण के आरोप लगाए हैं। हरियाणा की बेटियां जंतर-मंतर पर बैठ कर न्याय की गुहार लगा रही हैं। उन्होंने पॉस्को के मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में खुद को बेकसूर साबित करने का दायित्व आरोपी पर होता है। वहीं, खेल कोच और महिला पहलवानों के मामले में इनको ही सवालों के घेरे में खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब ओलंपिक और अन्य अंतराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ी पदक लाते हैं तो सभी राजनीतिक पार्टियां श्रेय लेने की होड़ में लग जाती हैं। अब न्याय की मांग कर रहे हैं, तो सवालों के घेरे में खड़े कर रहे हो।

महिला कोच को एक करोड़ ऑफर पर सवाल

उन्होंने मुख्यमंत्री खट्टर से सवाल करते हुए कहा कि अगर संदीप सिंह सही हैं तो जूनियर महिला कोच को एक करोड़ रुपए, क्यों ऑफर किया गया। दूसरा, महिला जूनियर कोच का ट्रांसफर वापस क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि क्या मुख्यमंत्री खट्टर ने एसआईटी महिला खिलाड़ी पर दबाव बनाने के लिए बनाई थी। अगर नहीं, तो एसआईटी की रिपोर्ट कब तक आएगी।

आज हर भारतवासी शर्मिंदा

आम आदमी पार्टी की वेस्ट जोन खेल संयोजक और डबल्यूडबल्यूई रेसलर कविता दलाल ने कहा कि जब ये खिलाड़ी ओलंपिक में मेडल जीत कर लाते हैं, तो हर भारतवासी को गर्व होता है। आज हर भारतवासी शर्मिंदा है। आखिर कब तक महिला खिलाडिय़ों के साथ ऐसा होता रहेगा। उन्होंने खुद ऐसी परिस्थितियों का सामना किया है और इसकी वजह से उन्हें वेटलिफ्टिंग का खेल छोड़ कर डबल्यूडबल्यूई की राह चुननी पड़ी थी।

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