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जावेद अख्तर का अभिनंदन!

SG

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रवाद और देशद्रोह की परिभाषा अलग है। जो उनकी पालकी नहीं उठाते और जो उनका गुलाम बनने को तैयार नहीं हैं, वे सभी उनकी नजर में देशद्रोही हैं। जो मोदी भक्त नहीं वह देश का नहीं, ऐसी उनकी सीधी-सीधी राय है। मोदी और उनकी तानाशाही पर हंटर चलाने वाला यदि कोई मुसलमान हो तो पूछना ही मत, लेकिन ऐसे ही एक मुस्लिम धर्म के लेखक-कवि ने जो मोदी और उनके अंधभक्त नहीं कर पाए, उसे पाकिस्तान में घुसकर कर दिखाया। वरिष्ठ कवि-गीतकार, लेखक जावेद अख्तर ने पाकिस्तान में घुसकर पाकड़ियों पर हमला बोला। शायर फैज अहमद फैज स्मृति दिन पर लाहौर के उत्सव में जावेद अख्तर को आमंत्रित किया गया था। खास बात यह है कि पाकिस्तान ने उन्हें ‘वीजा’ देकर लाहौर आने दिया; लेकिन श्री अख्तर ने इस मौके का फायदा उठाया और यजमानों को खड़े बोल सुनाए। अख्तर ने मंच से ही पाकड़ियों को सुनाया, ‘मुंबई पर २६/११ के आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड अभी भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है। हम मुंबईकर हैं। हमने अपने शहर पर हुआ हमला देखा है। हमलावर नॉर्वे या इजिप्त से नहीं आए थे, वे आपके देश से आए थे। अगर इसे लेकर भारतीय लोगों की शिकायत है तो पाकिस्तान के लोगों को अपमान नहीं समझना चाहिए।’ पाकिस्तान जाकर इस तरह से ‘खड़े बोल’ सुनाना आसान नहीं है। यहां दिल्ली और मुंबई में बैठकर पाकिस्तान को दम देना आसान है। चुनाव के मौके पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करके ‘घुसकर मारेंगे’, की गर्जना होती रहती है, लेकिन दुश्मन की मांद में घुसकर, ‘आप ही हमारे देश के शत्रु हो। सहन कैसे करेंगे? ऐसा मुंह पर बोलने वाला ही सच्चा देशभक्त होता है। अख्तर ने यह भी कहा, ‘नुसरत फतेह अली खान, मेहंदी हसन, गुलाम अली जैसे पाकिस्तानी कलाकारों का भारत में अपनेपन की तरह स्वागत किया गया। उनके कार्यक्रमों में भारी भीड़ हुई, लेकिन लता मंगेशकर का एक भी कार्यक्रम पाकिस्तान में कभी नहीं हुआ। जावेद अख्तर द्वारा यह बात समझाए जाते ही दर्शक तालियां बजाने लगे। तालियां बजाकर अख्तर का समर्थन करनेवाले श्रोताओं की हिम्मत की भी दाद देनी पड़ेगी। अख्तर ने देशभक्ति और हिम्मत की एक ‘मिसाल’ देश के सामने रखी है। हमें छोड़कर और सब देशद्रोही की इस जहरीली प्रवृत्ति पर जावेद ने तमाचा जड़ दिया है। विशेष बात यह है कि पाकिस्तान के श्रोताओं और वहां के आज के हुक्मरानों ने जावेद के इस बयान को बर्दाश्त किया, लेकिन क्या हमारे देश में इतनी सहनशीलता और संयम आज बचा है? चुनाव जीतने के लिए हिंदू-मुस्लिम, भारत-पाकिस्तान का बखेड़ा खड़ा करना। गोरक्षा के नाम पर बेकसूर मुस्लिम युवकों को जलाना, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के खुद के नेता, मंत्री ‘हम गोमांस खाते हैं,’ ऐसा खुलेआम बोलते रहते हैं। उन पर आंखें घुमाने की हिम्मत नहीं है। पाकिस्तान देश का दुश्मन है, वैसे ही चीन भी है, लेकिन मोदी केवल पाकिस्तान को दम देते हैं और चीन का नाम लेने से डरते हैं, यह वास्तविकता है। कुछ चीनी ‘ऐप्स’ आदि पर बैन लगा देने भर तक मोदी सरकार की चीन के खिलाफ ‘हिम्मत’ खत्म हो जाती है। हालांकि, ये लोग पाकिस्तान और भारत के आम मुसलमानों के खिलाफ एक उग्र माहौल बनाते हैं। क्योंकि यह आसान है और इस पर वे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक सकते हैं। ऐसी राजनीतिक रोटियां सेंकने वालों को जावेद अख्तर ने सीधे लाहौर में जाकर झटका दिया। कभी लाहौर में भी तिरंगा लहराता था। शायर फैज अहमद फैज के लाहौर में हुए स्मृति समारोह के उपलक्ष्य में जावेद अख्तर महोदय ने उसे फिर फहरा दिया। एक बार अभिनेता फिरोज खान एक कार्यक्रम के लिए पाकिस्तान गए और वहां तिरंगे को उल्टा फहराते देखा तो वे आगबबूला हो गए थे। उनके अंदर का देशभक्त उबल पड़ा था और उन्होंने भी पाकड़ियों को खड़े बोल सुनाए थे; लेकिन आज हमारे देश में सिर्फ मुसलमानों से ही देशभक्ति का सर्टिफिकेट मांगा जाता है। संघ परिवार से, भाजपा से कोई पाकिस्तान जाकर जावेद अख्तर की तरह चढ़ाई करने की हिम्मत दिखाए। फ्री के बुलबुले यहां बैठकर न फो़ड़ें। जावेद अख्तर ने दिखा दिया कि ५६ इंच का सीना क्या होता है। उनका विशेष अभिनंदन!

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