राष्ट्रीय

लद्दाख हिंसा का आरोप सोनम वांगचुक पर, गृह मंत्रालय ने कहा, भडक़ाऊ भाषण से भीड़ को उकसाया

लेह

लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन के लिए गृह मंत्रालय ने शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है। गृह मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी किया है कि सोनम वांगचुक ने अपने भडक़ाऊ बयानों के माध्यम से भीड़ को उकसाया था। हिंसक घटनाओं के बीच उन्होंने अपना उपवास तोड़ा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यापक प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सोनम वांगचुक द्वारा 10 सितंबर, 2025 को छठी अनुसूची और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की गई थी। भारत सरकार इन्हीं मुद्दों पर एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है।

उच्चाधिकार प्राप्त समिति और उप-समितियों के औपचारिक माध्यम से और नेताओं के साथ कई अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से उनके साथ कई बैठकें हुईं। हालांकि, कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित लोग उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के तहत हुई प्रगति से खुश नहीं थे और संवाद प्रक्रिया को विफल करने की कोशिश कर रहे थे। गृह मंत्रालय ने आगे कहा कि जिन मांगों को लेकर वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वे एचपीसी में चर्चा का अभिन्न अंग हैं। कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करने के बावजूद, उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी और अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों का भडक़ाऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।

वांगचुक के एनजीओ का विदेशी फंडिंग लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक के नेतृत्व वाली संस्था स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीएमओएल) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत मिला लाइसेंस रद्द कर दिया है। सरकार के आदेश के अनुसार, संस्था अब विदेश से चंदा या किसी भी तरह की आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं कर सकेगी।

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