उत्तर प्रदेश

7 अक्टूबर तक फैसला नहीं तो 8 से ठप होंगी एनएचएम सेवाएं!, मुजफ्फरनगर से आर-पार के आंदोलन का ऐलान

7 अक्टूबर तक फैसला नहीं तो 8 से ठप होंगी एनएचएम सेवाएं!
—लिखित समझौतों के लागू न होने से भड़का संविदा कर्मचारियों का आक्रोश, प्रदेश के एक लाख से अधिक कर्मचारी कार्य बहिष्कार की तैयारी में—मुजफ्फरनगर से आर-पार के आंदोलन का ऐलान
मुजफ्फरनगर। वर्षों से लंबित मांगों और सरकार के साथ हुए लिखित समझौतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मुजफ्फरनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्मचारियों ने सरकार को 7 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि तय समयसीमा तक मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से प्रदेशभर के एक लाख से अधिक एनएचएम संविदा कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर आंदोलन शुरू करेंगे। कर्मचारियों ने साफ किया कि वे किसी सरकार से टकराव नहीं चाहते, बल्कि पूर्व में हुए लिखित समझौतों और आश्वासनों को लागू कराने की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को जिला चिकित्सालय स्थित आयुष विंग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ की मुजफ्फरनगर शाखा के पदाधिकारियों ने आंदोलन की रणनीति और लंबित मांगों को लेकर अपना पक्ष रखा। प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर के आह्वान पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय से आश्वासन दिए जाते रहे हैं। कई मौकों पर सरकार और अधिकारियों के साथ लिखित समझौते भी हुए, लेकिन समझौतों को लागू करने की बारी आने पर मामला फाइलों में अटकता चला गया। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं। सरकार को स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करना होगा, तभी कर्मचारियों का भरोसा वापस लौटेगा। डॉ. सचिन जैन ने वर्ष 2016 में हुए आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय एनएचएम कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर 15 दिन तक लगातार हड़ताल और इसके बाद 10 दिन की भूख हड़ताल की थी। आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के साथ लिखित समझौता हुआ था। कर्मचारियों के अनुसार समझौते में एनएचएम कर्मचारियों को नियमित भर्ती में अतिरिक्त अंक दिए जाने की मांग पर सहमति बनी थी और इसे शीघ्र लागू करने का भरोसा दिया गया था। लेकिन संगठन का आरोप है कि करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी इस संबंध में प्रभावी आदेश जारी नहीं हुआ।
कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2016 में हुए समझौते का लाभ मिलने की उम्मीद में कई कर्मचारी वर्षों तक इंतजार करते रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित आयु सीमा पार कर गए। संगठन का कहना है कि समझौते को लागू करने में हुई देरी अब कर्मचारियों के लिए दोहरी परेशानी बन गई है। डॉ. सचिन जैन ने कहा कि वर्ष 2016 के समझौते में अन्य राज्यों की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात भी कही गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. राहुल वर्मा ने वर्ष 2021 के आंदोलन के बाद हुए समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि उस समय कर्मचारियों के लिए प्रत्येक तीन वर्ष पर 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस और प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत इंक्रीमेंट दिए जाने की बात कही गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि समझौते के बावजूद इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। उनका आरोप है कि लगातार समझौतों और आश्वासनों के बाद भी धरातल पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। संगठन के महामंत्री मणिकांत त्यागी ने कहा कि बार-बार मिलने वाले आश्वासन अब कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी वर्षों से अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सरकार से मांगों के संबंध में स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करने की मांग की। डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा कि यदि 7 अक्टूबर तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एनएचएम संविदा कर्मचारी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में उनकी भूमिका है। ऐसे में बड़े स्तर पर कार्य बहिष्कार होने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। आंदोलन से पहले संगठन के पदाधिकारी पिछले करीब 15 दिनों से लगातार जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उनका प्रयास है कि आंदोलन की नौबत आने से पहले ही सरकार उनकी मांगों का समाधान कर दे। कोषाध्यक्ष डॉ. फैसल सिद्दीकी ने बताया कि कर्मचारियों ने विभिन्न मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और समाधान कराने का आग्रह किया है। जिला महिला चिकित्सालय के संजय कुमार ने बताया कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब अंतिम समाधान सरकार के स्पष्ट आदेश से ही संभव होगा। डॉ. शमशेर ने बताया कि कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी मिला। उनके अनुसार पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से फोन पर वार्ता कर मांगों के समाधान में सहयोग का आग्रह किया। कर्मचारियों ने कहा कि वे लगातार जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। स्टाफ नर्स डिंपल रानी ने कहा कि कर्मचारियों की ओर से लखनऊ में पूर्व में दिए गए नियमितीकरण और अन्य सुविधाओं से संबंधित आश्वासनों का भी लगातार हवाला दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों बीतने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ती जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत रवि कुमार ने कहा कि कर्मचारियों का भरोसा तभी वापस लौटेगा, जब सरकार उनकी मांगों के संबंध में स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करेगी। एनएचएम संविदा कर्मचारियों की संख्या प्रदेश में एक लाख से अधिक बताई जा रही है। संगठन की ओर से कार्य बहिष्कार का ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं में संविदा कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यदि सरकार और संगठन के बीच 7 अक्टूबर तक सहमति नहीं बनती है और 8 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार शुरू होता है, तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की संभावना है। हालांकि कर्मचारी संगठन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता आंदोलन नहीं, बल्कि मांगों का सम्मानजनक और लिखित समाधान है। संगठन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का संघर्ष किसी सरकार या अधिकारी के खिलाफ नहीं है। उनकी मांग पूर्व में हुए लिखित समझौतों को लागू कराने और लंबे समय से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान कराने की है। कर्मचारियों ने दोहराया कि यदि सरकार समय रहते ठोस निर्णय लेती है तो कार्य बहिष्कार की स्थिति टाली जा सकती है। लेकिन यदि 7 अक्टूबर तक कोई स्पष्ट लिखित फैसला नहीं आया तो 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. फैसल सिद्दीकी, डॉ. सुदेश वर्मा, डॉ. शमशेर, स्टाफ नर्स डिंपल रानी, डाटा ऑपरेटर संजय कुमार, रवि कुमार, डाइटिशियन नेहा त्यागी समेत संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में एनएचएम संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Response