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Tokyo Olympic 2021: पिता ने कहा था- गांव की बेटियों को विदेश कौन ले जाएगा, अब टोक्यो ओलंपिक में खेलेगी बेटी

Tokyo Olympic 2021: पिता ने कहा था- गांव की बेटियों को विदेश कौन ले जाएगा, अब टोक्यो ओलंपिक में खेलेगी बेटी

हॉकी खेल से जो सम्मान मिला है उसे मैं लब्जों में बयान नहीं कर सकती। मैंने मेहनत की और आज मैं भारतीय टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हूं। मेरे पिता हर समय मुझे हौसला देते थे ताकि मैं अपने खेल पर फोकस कर सकूं। यह कहना है हरियाणा के सिरसा जिले के जोधका गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया का। उन्होंने बताया कि छठी कक्षा में हॉकी स्टिक को पकड़ा था। उस समय हॉकी स्टिक उनके कंधे तक आती थी। सन् 2004 में उन्होंने सिरसा के महाराजा अग्रसेन स्कूल में कोचिंग शुरू की। स्कूल में खेल गतिविधियों में सविता पूनिया की फुर्ती देखकर अध्यापक दीपचंद ने उनके पिता महेंद्र पूनिया से हॉकी नर्सरी में नाम दर्ज करवाने की बात कही थी। उस समय अभिभावकों का बेटियों को खेलकूद के क्षेत्र में भेजने का रुझान नहीं था लेकिन पिता ने हॉकी की कोचिंग दिलवाने पर सहमति जताई।पिता से बात करते समय अध्यापक दीपचंद ने मजाक में कहा था कि अच्छा खेलेगी तो एक दिन विदेश जाएगी। जिस पर पिता ने कहा कि गांव की बेटियों को विदेश कौन लेकर जाएगा।कोचिंग के दौरान खेल छोड़ने का भी बनाया था मन

नर्सरी हॉकी में दाखिले के बाद शुरूआती दो साल कोचिंग के बहुत कठिन थे, इस दौरान कई बार खेल छोड़ने का मन किया। पिता ने भी कहा अगर सहीं नहीं लग रहा तो छोड़ दे। रात भर सोचने के बाद सुबह खुद ब खुद दिमाग हॉकी स्टिक को खोजने लगता।सविता पूनिया भारतीय महिला हॉकी टीम में गोल कीपर के तौर पर खेलती हैं। सन् 2008 में जर्मनी में हॉकी टूर्नामेंट के बाद हॉकी स्टिक को सविता ने कभी अपने से दूर नहीं होने दिया। सबसे पहले 2016 में ओलंपिक खेला और अब 2021 में टोक्यो ओलंपिक खेल रही हूं।वर्ष 2018 में सविता पूनिया अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं। सविता के पिता महेंद्र पूनिया स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब बेटी खेल को छोड़ने का मन बनाती थी तो वह उसकी बात पर हमेशा सहमति देते थे।

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