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कविता

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पास आकर सब दूर चले जाते है ,अकेले थे अकेले रह जाते है ।
दिल का दर्द किसको दिखाये ,
मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते है ।

कैसे कहूं की रूह में बसने लगे हो तुम,
आगाज़ ज़िंदगी का लगने लगे हो तुम…
एक बार अपने दिल से लगा लो आकर,
दिल कह रहा है कि दिल में धड़कने लगे हो तुम..!!!

सांसो का सांसो से बन्धन अजीब है ,प्रेम में पड़ना अजीब है
एहसाह बहुत खास होते है प्रियंका ,
दिल में धड़कन बन बसना अजीब है।

आपकी मुस्कान हमारी कमजोरी है ,न बता पाना इस दिल की मजबूरी है ।
क्यों नही समझते आप इस बात को ,क्या ख़ामोशी को जुबान देना जरूरी है।                             

                                        प्रियंका द्विवेदी
                                     मंझनपुर कौशाम्बी ।

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