राष्ट्रीय

लखनऊ निदेशक सूचना श्री शिशिर जी के सुपुत्र शक्ति सिंह ने अर्जित किये 97.25% अंक

हर माता-पिता का संतान होने पर स्वप्न होता है कि उनकी संतान जीवन में अपना ही नहीं बल्कि हमारा(माता-पिता) भी नाम रोशन करके एक नए जीवन का अहसास कराएगा। लेकिन जब वही संतान इसके विपरीत जाए, अंदर से आत्मा रोती है, परन्तु आशानुरूप परिणाम मिलने पर उनकी ख़ुशी की कोई सीमा नहीं होती। 

 

बच्चे भी माता-पिता की आशाओं के अनुरूप परिणाम देने पर कुछ रूपए अथवा वस्तु देने पर खुश हो जाते हैं, लेकिन इन संसारिक दिखावे के अतिरिक्त दिल में हुई ख़ुशी को नहीं समझ पाते। जिसका अनुभव करने फ्रांसिस बेकन के एक अध्याय शीर्षक ‘Of Parents and Children’ का अध्ययन करना चाहिए। जिसे सरल भाषा में कहते हैं जीवन।
लखनऊ निदेशक सूचना श्री शिशिर जी के सुपुत्र शक्ति सिंह ने किया अपने पिता के साथ साथ परिवार का नाम रोशन। शक्ति सिंह ने 12 वीं की परीक्षा में हासिल किए 97.25% अंक। मानविकी स्ट्रीम के छात्र हैं शक्ति सिंह।

शक्ति जिस मानविकी स्ट्रीम से है, उसमे सफलता पाना कोई आसान नहीं। मानविकी वे शैक्षणिक विषय हैं जिनमें प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञानों के मुख्यतः अनुभवजन्य दृष्टिकोणों के विपरीत, मुख्य रूप से विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक या काल्पनिक विधियों का इस्तेमाल कर मानवीय स्थिति का अध्ययन किया जाता है। वास्तव में हमारी सरकारों ने भारतीय संस्कृति को दरकिनार कर पश्चिमी सभ्यता का संचार किया है, उस कारण हम अपनी सभ्यता ही भूल गए। लेकिन जब शक्ति सिंह जैसी युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन भाषाओँ का आधुनिक भाषा के साथ समावेश कर ज्ञान का संचार करेगी, निश्चितरूप से भारत में एक नयी ऊर्जा का संचार होगा, जो भारत के विकास में सार्थक सिद्ध होगा।

प्राचीन और आधुनिक भाषाएं, साहित्य, कानून, इतिहास, दर्शन, धर्म और दृश्य एवं अभिनय कला (संगीत सहित) मानविकी संबंधी विषयों के उदाहरण हैं। मानविकी में कभी-कभी शामिल किये जाने वाले अतिरिक्त विषय हैं प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी), मानव-शास्त्र (एन्थ्रोपोलॉजी), क्षेत्र अध्ययन (एरिया स्टडीज), संचार अध्ययन (कम्युनिकेशन स्टडीज), सांस्कृतिक अध्ययन (कल्चरल स्टडीज) और भाषा विज्ञान (लिंग्विस्टिक्स), हालांकि इन्हें अक्सर सामाजिक विज्ञान (सोशल साइंस) के रूप में माना जाता है। मानविकी पर काम कर रहे विद्वानों का उल्लेख कभी-कभी “मानवतावादी (ह्यूमनिस्ट)” के रूप में भी किया जाता है। हालांकि यह शब्द मानवतावाद की दार्शनिक स्थिति का भी वर्णन करता है जिसे मानविकी के कुछ “मानवतावाद विरोधी” विद्वान अस्वीकार करते हैं।

साभार आरबीएल निगम

 

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