राष्ट्रीय

मुगलों ने धर्म के नाम कभी नहीं किया अत्याचार नहीं किया, वे देशप्रेमी थे : मणिशंकर अय्यर

 

अपने विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने इस बार मुगल शासन की जमकर तारीफ की है। बाल दिवस के रूप में मनाए जाने वाले जवाहरलाल की जयंती (14 नवंबर 2021) पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मणिशंकर अय्यर ने मुगलों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों की बात को गलत बताया।

अय्यर ने दावा किया कि मुगलों ने कभी देश में धर्म के नाम पर अत्याचार किया ही नहीं। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर के शासन से लेकर तमाम दूसरे मुगल बादशाहों का उदाहरण देकर दावा किया कि मुगल शासन में जोर-जबरदस्ती द्वारा कभी धर्म परिवर्तन नहीं करवाया गया। उन्होंने मुगलों को देशप्रेमी बताया।

 

मणिशंकर अय्यर ने भाजपा पर घृणा फैलाने और देश में लोगों को बाँटने का आरोप भी लगाया। अपने संबोधन में मणिशंकर अय्यर ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि मुसलमानों की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है। मुसलमानों की जनसंख्या को लेकर अपने बयान के समर्थन में तर्क पेश करते हुए अय्यर ने पहली जनगणना का हवाला का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1872 में देश में 72 फीसदी हिंदू थे और 24 फीसदी मुस्लिम थे। कमोबेश ये संख्या अब भी वैसी ही है, इसलिए मुस्लिमों पर जनसंख्या बढ़ाने के आरोप पूरी तरह से गलत हैं। अय्यर ने कहा कि 1872 में अंग्रेजों ने पहला सेंसस करवाया और उससे पता लगा कि 666 साल राज करने के बाद मुसलमानों की तादाद भारत में क़रीब 24 फीसदी और हिंदुओं की 72 फीसदी थी।

उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, “ये कहते हैं कि मारपीट हुई, सब लड़कियों से बलात्कार हुआ और इन्होंने सबको मुसलमान बना लिया। अरे… मुसलमान बनते तो आँकड़े तो अलग होने चाहिए। 72 प्रतिशत मुसलमान होने चाहिए और 24 प्रतिशत हिंदू होने चाहिए, लेकिन असलियत क्या थी कि इतने ही थे और इसलिए पार्टीशन माँगने के पहले जिन्ना जी की बस एक ही माँग थी कि 30 फीसदी आरक्षण दीजिए सेंट्रल एसेंबली में….उन्होंने ये नहीं माँगा कि हमें 80 दो या 90 दो….उन्होंने 30 प्रतिशत माँगा..और ये इनकार किया गया क्योंकि उनकी तादाद मात्र 26 प्रतिशत की थी उस दिन।”

‘भारत को अपना देश मानते थे मुगल’

मुगलिया शासन की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए अय्यर ने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों में बड़ा फर्क ये था कि मुगल इस देश को अपना मानते थे। मणिशंकर अय्यर ने बाबर की तारीफ कहते हुए कहा कि बाबर ने अपने बेटे हूमायूँ को चिट्ठी लिखी थी जिसमें हिंदुस्तान के लोगों के धर्म में किसी तरह का दखल ना देने की बात कही थी। यही वजह है कि अकबर के शासन में धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं होता था। वो आगे कहते हैं, “अकबर ने इस देश में पचास साल तक राज किया। दिल्ली में एक सड़क है, जहाँ कॉन्ग्रेस दफ्तर है, वह अकबर रोड पर है। हमें अकबर रोड से कोई ऐतराज नहीं। हम अकबर को अपना समझते हैं और हम उन्हें गैर नहीं समझते थे।”

उन्होंने कहा, “मुगलों ने इस देश को अपना बनाया। अंग्रेजों ने कहा कि हम तो यहाँ राज करने आए हैं। बाबर जो थे..जिसकी औलाद भारतीय जनता पार्टी के लोग मुझे नाम देते हैं…कि ये बाबर की औलाद है…इन लोगों को मैं बताना चाहता हूँ कि वही बाबर भारतवर्ष आया सन 1526 में और उनकी मौत हुई 1530 में..मतलब वो भारत में मात्र 4 साल रहे…उन्होंने हूमायूँ को बताया कि यदि आप इस देश को चलाना चाहते हो…यदि आप अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखना चाहते हो तो आप यहाँ के निवासियों के धर्म में दखल मत देना।”

अय्यर ने कहा, “राहुल जी ने हाल में दो-तीन दिन पहले ये कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में अंतर है। मैं उसके साथ जोड़ना चाहता हूँ कि अंतर ये है कि हम हिंदू धर्म पर विश्वास करते हैं। हम 100 प्रतिशत भारतीय हैं। हम सारे जो इस देश के बाशिंदे हैं, हम उनको भारतीय समझते हैं और चंद लोग हैं हमारे बीच में जो आज के दिन सत्ता में हैं, जिनका कहना है कि नहीं, 80 प्रतिशत भारतीय, जो कि 80 हिन्दू धर्म को मानते हैं, वही हैं असली भारतीय। और बाकी जो लोग हैं, वो गैर-भारतीय हैं। हमारे देश में वह रह रहे हैं तो केवल मेहमान बन कर रह रहे हैं और हम उनको जब चाहें देश से निकाल देंगे। उनका बस एक कर्तव्य बनता है कि जो पथ पर हम निकले हुए हैं, उसी पथ पर वो भी निकले।”

बता दें कि राहुल गाँधी ने बीते दिनों हिंदुत्व और हिंदू धर्म पर अंतर स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि क्या सिख या मुसलमान को पीटना हिंदू धर्म है? हिंदुत्व तो निश्चित रूप से यही है। यह किस किताब में लिखा है? मैने इसे नहीं देखा है। मैंने उपनिषद पढ़े हैं। लेकिन मैंने इसे वहाँ भी नहीं पढ़ा है। राहुल गाँधी का बयान सलमान खुर्शीद के उस बयान के संदर्भ में आया था, जिमसें उन्होंने हिंदू धर्म की तुलना आतंकवादी समूहों बोको हरम और आईएसआईएस के जिहादी इस्लाम से की थी।

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