अंतरराष्ट्रीय

भारत-अमेरिका के बीच टू प्‍लस टू वार्ता में रूस यूक्रेन जंग का साया, भारत के लिए क्‍यों अहम है यह बैठक

Russia-Ukraine war in India-US two plus two talks, why is this meeting important for India

नई दिल्‍ली। रूस और यूक्रेन जंग के बीच भारत और अमेरिका के बीच टू प्‍लस टू वार्ता होने जा रही है। खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब रूस को लेकर वाशिंगटन और नई दिल्‍ली के बीच रिश्‍तों में थोड़े मतभेद पैदा हुए है। ऐसे में दुनिया की निगाह खासकर चीन और रूस की निगाह इस वार्ता पर टिकी है। क्‍या इस वार्ता के जरिए दोनों देशों के बीच उत्‍पन्‍न हुए मतभेद कम होंगे? क्‍या भारत बाइडन प्रशासन को अपने राष्‍ट्रीय हितों को समझा पाने में सफल होगा? यहां एक सवाल और उत्‍पन्‍न होता है कि आखिर दोनों देशों के बीच टू प्‍लस टू वार्ता का मकसद क्‍या है? क्‍या अमेरिका और भारत इस लक्ष्‍य को पाने में सफल रहे हैं। रूस और चीन की इस वार्ता पर क्‍यों नजर है?
भारत के पास बेहतरीन कूटनीतिक मौका
1- प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि अमेरिका और भारत के बीच टू प्‍लस टू वार्ता ऐसे समय हो रही है जब रूस को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ अनबन चल रही है। ऐसे में भारत के पास यह बेहतरीन कूटनीतिक मौका है, जब वह अपनी आंतरिक समस्‍या को अमेरिका के समक्ष रख सकता है। रूस यूक्रेन जंग में भारत अपनी तटस्‍थ नीति को राष्‍ट्रीय हितों के अनुरूप सिद्ध कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि रूस यूक्रेन जंग अमेरिका भारत की तटस्‍थता नीति पर सवाल उठा रहा है। इसके अलावा वह भारत के रुख को रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के प्रतिकूल मानता है। रूस से पेट्रोलियम पदार्थों का मामला हो या एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्‍टम की बात हो सभी पहलुओं पर भारत अपना दृष्टिकोण साफ कर सकता है। भारत यह बता सकता है कि रूस और भारत के संबंध कैसे उसके हित में है।
2- टू प्‍लस टू वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब भारत रूस यूक्रेन जंग को लेकर कूटनीतिक मोर्चे पर चुनौती बनी हुई है। सुरक्षा परिषद में भारत की गैरमौजूदगी भी अमेरिका को अखरी थी। इतना ही नहीं क्‍वाड देशों के जरिए भी भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। हाल में बाइडन प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों ने भी भारत को सख्‍त चेतावनी दी थी। हालांकि, भारत ने अपने राष्‍ट्रीय हितों का हवाला देते हुए अपनी तटस्‍थता नीति को जायज ठहराया था। अब यह भारत के पास मौका है कि वह रूस यूक्रेन जंग पर अपनी स्थिति को साफ कर सके।
क्‍या है टू प्‍लस टू वार्ता का मकसद
1- दोनों देशों के बीच टू प्लस टू वार्ता एक ऐसी मंत्रिस्तरीय वार्ता होती है, जो दो देशों के दो मंत्रालयों के मध्य आयोजित की जाती है। भारत और अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता दोनों देशों के मध्य एक उच्चतम स्तर का संस्थागत तंत्र है, जो भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है। भारत और अमेरिका के बीच आयोजित यह पांचवीं टू प्लस टू वार्ता है। यह वार्ता भारत और अमेरिका के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक एवं रणनीतिक सहयोग पर केंद्रीत है। इसके साथ हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभुत्‍व को सीमित करने के उपायों पर विचार करने के लिए है।
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2- प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि भारत के रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अड़चनें समाप्त होंगी। इससे भारतीय सेना के पास हथियार एवं अन्य सैन्य उपकरणों के भंडार में वृद्धि होगी। यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद तथा पड़ोसी देशों की अस्थिर गतिविधियों से भारत की रक्षा करने के लिये अत्यंत आवश्यक है। इसके जरिए रक्षा एवं उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारत-अमेरिका व्यापार तथा तकनीकी सहयोग को और भी सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। अमेरिका द्वारा आतंकवाद की समाप्ति के लिए भारत का समर्थन किये जाने से भारत में सीमा पार आतंकवाद में कमी आएगी।
इस वार्ता को लेकर अमेरिका उत्‍साहित
रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते बदलती भू-राजनीति के बीच भारत व अमेरिका में 11 अप्रैल को वाशिंगटन में चौथी टू प्लस टू वार्ता होने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर शीर्ष अधिकारियों के शिष्टमंडल के साथ वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा एवं अन्य क्षेत्रों में चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। रूस और यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। उधर, अमेरिका इस वार्ता को लेकर उत्‍साह‍ित है। अमेरिका ने कहा कि टू प्लस टू वार्ता अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के महत्व को रेखांकित करेगी। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना का यह 75वां वर्ष है। वार्ता मुक्त, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करेगी।

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