16 सितंबर को 7500 स्टूडेंट्स को स्कूटी देंगे सीएम:तीन साल तक बेच नहीं पाएंगे स्कूटी, 70% से ज्यादा अंकों वाले टॉपर्स को फायदा

16 सितंबर को 7500 स्टूडेंट्स को स्कूटी देंगे सीएम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 16 सितंबर को प्रदेश के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों के 7,500 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत ई-स्कूटी/मोटराइज्ड वाहन की सौगात देंगे। स्कूटी वितरण का राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिवाजी नगर में होगा।
पहली बार 70% अंक वाले छात्रों को मिलेगी स्कूटी
योजना के तहत 12वीं में स्कूल में प्रथम स्थान पाने वाले और पहले प्रयास में न्यूनतम 70% अंक हासिल करने वाले विद्यार्थी पात्र हैं। 2026 में 70% अंक की शर्त जोड़ी गई है। इस बार विभाग ने स्कूटी खरीदने की प्रक्रिया को लेकर भी जिला शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
सबसे अहम यह है कि विद्यार्थी के खाते में राशि आने से पहले वाहन खरीद लिया तो विद्यार्थी, उसके पालक और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। यानी पहले वाहन खरीदकर बाद में सरकार से राशि लेने की अनुमति नहीं होगी।

पहले पैसे, फिर स्कूटी लें… वरना तीन पर कार्रवाई
विभाग ने साफ किया है कि पात्र विद्यार्थी को राशि उपलब्ध होने के बाद ही वाहन खरीदना होगा। यदि राशि खाते में आने से पहले ही विद्यार्थी वाहन खरीद लेता है तो केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि उसके पालक और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय होगी।
आदेश में ऐसे मामले में विद्यार्थी, पालक और DEO के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने की बात कही गई है। इससे यह भी स्पष्ट है कि जिला शिक्षा अधिकारियों को भुगतान और वाहन खरीद की प्रक्रिया पर निगरानी रखनी होगी।
70% अंक और स्कूल में फर्स्ट आना दोनों जरूरी
योजना का लाभ अब केवल स्कूल टॉप करने से नहीं मिलेगा। विद्यार्थी को शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल का नियमित विद्यार्थी होना होगा। कक्षा 12वीं की परीक्षा प्रथम प्रयास में देनी होगी।
न्यूनतम 70% अंक हासिल करना होगा। अपने स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त करना होगा। सभी संकायों के विद्यार्थियों को पात्रता में शामिल किया गया है। 2026 में 70% की न्यूनतम सीमा को पात्रता में शामिल किया गया है। जुलाई 2026 के शासन आदेश में योजना को 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹495 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति भी दी गई है।
पेट्रोल वाहन के लिए 90 हजार, ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख
पात्र विद्यार्थी को मोटराइज्ड वाहन चुनने पर अधिकतम 90 हजार रुपए और ई-स्कूटी चुनने पर अधिकतम 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि मिलेगी। इस राशि में वाहन की एक्स-शोरूम कीमत के साथ रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, दो हेलमेट और एसेसरीज की राशि भी शामिल है।
यानी सरकार की ओर से निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर ही वाहन का चयन करना होगा।
पसंद का वाहन चुनेंगे, लेकिन डीलर से कोटेशन जरूरी
विद्यार्थी वाहन विक्रेता के शोरूम पर जाकर अपनी पसंद का वाहन चुन सकेंगे। इसके बाद डीलर से कोटेशन लेना होगा। इस कोटेशन में एक्स-शोरूम कीमत, रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज का पूरा विवरण रहेगा। विद्यार्थी को यह कोटेशन अपने स्कूल के प्राचार्य को देना होगा। प्राचार्य इसे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेजेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी कोटेशन के आधार पर वाहन के लिए स्वीकृत राशि की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
मनमाना वाहन नहीं ले सकेंगे
आदेश में जिला शिक्षा अधिकारियों को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पात्र विद्यार्थियों के कोटेशन में निर्धारित वाहन के अलावा किसी अन्य वाहन का चयन नहीं किया जाए। उदाहरण के तौर पर आदेश में मोटर बाइक आदि का चयन नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। यानी योजना की राशि को विद्यार्थी अपनी इच्छा से किसी भी तरह के दोपहिया वाहन पर खर्च नहीं कर सकेगा।
पैसा सीधे खाते में जाएगा, खाता नहीं तो पैरेंट्स के खाते में
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्धारित राशि सीधे कोषालय के माध्यम से विद्यार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। यदि विद्यार्थी का अपना बैंक खाता नहीं है तो राशि माता-पिता या अभिभावक के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। इसके लिए बैंक खाते का आधार नंबर भी लिया जाएगा। विद्यार्थी की बैंक पासबुक के पहले पेज की छायाप्रति में खाता क्रमांक और IFSC कोड दर्ज होना जरूरी है। यह जानकारी विभागीय पोर्टल पर भी दर्ज की जाएगी।

तीन साल तक बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे वाहन
योजना के तहत वाहन मिलने के बाद विद्यार्थी उसे तीन साल तक किसी दूसरे व्यक्ति को बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। इसके लिए वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय तीन साल के लिए मध्यप्रदेश शासन के नाम हाइपोथिकेशन दर्ज कराया जाएगा। यानी वाहन की आरसी में सरकार का हित दर्ज रहेगा और तय अवधि से पहले उसका ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस की जिम्मेदारी डीलर की
रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज से संबंधित राशि संबंधित वाहन विक्रेता के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इसके बाद वाहन विक्रेता को रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस आदि की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे विद्यार्थियों को वाहन खरीदने के बाद इन औपचारिकताओं के लिए अलग से परेशान नहीं होना पड़ेगा।
समारोह के दिन ही वाहन उपलब्ध कराने की तैयारी
जिला शिक्षा अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन विक्रेता को राशि उपलब्ध होने के बाद वितरण समारोह में पात्र विद्यार्थियों को वाहन उपलब्ध कराया जा सके।
आदेश में कहा गया है कि समारोह की तारीख पर संबंधित वाहन उपलब्ध होना सुनिश्चित किया जाए। यानी राशि जारी होने और वाहन वितरण के बीच अनावश्यक देरी नहीं हो, इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों और डीलरों पर रहेगी।
कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति करेगी निगरानी
योजना की पूरी प्रक्रिया के समन्वय और निर्देशों के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। इसमें जिला परिवहन अधिकारी और जिला कोषालय अधिकारी सदस्य होंगे, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य सचिव रहेंगे। समिति वाहन चयन, भुगतान और वितरण से जुड़ी प्रक्रिया के समन्वय में भूमिका निभाएगी।
योजना पर अब तक 246 करोड़ रुपए खर्च
सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत अब तक प्रदेश के 23 हजार से ज्यादा विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना पर अब तक करीब 246 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
इस योजना का उद्देश्य शासकीय स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें कॉलेज आने-जाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
