हिमाचल प्रदेश

AI ट्रेंड बन सकता है परेशानी; पर्सनल डेटा हो सकता है लीक, बढ़ सकता है जल संकट

 

तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का डर

अगर आप भी फेसबुक, इंस्टा या व्हाटसैप इस्तेमाल करते हैं, तो पिछले कुछ दिनों में आपने एक बड़ा चेंज अपनी फीड में देखा होगा। आपको भी लगातार अपने जानने पहचाने या फिर नेता से लेकर अभिनेताओं तक के ऐसे फोटो नजर आ रहे होंगे। जो रेट्रो लुक में हैं। बड़े- बड़े बाल, फेदर्ड हेयरस्टाइल, बोल्ड कपड़े, विंटेज मेकअप और एसिड-वॉश डेनिम वाले रेट्रो पोर्ट्रेट इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। आसान भाषा में हम इसे 80s trend कह रहे हैं  और ये सब हो पा रहा है ai की वजह से, इस तरह की तस्वीर बनाने के लिए यूजर को बस अपनी फोटो ai को देनी होती है फिर प्रॉम्पट देने के कुछ ही सेकंड में उसका 80 का अवतार तैयार हो जाता है। जितना क्लीयर आपका प्रॉम्पट होगा, उतनी ही शानदार आपकी तस्वीर। हो सकता है आपने भी अब तक इस ट्रेंड को फोलो कर अपना 80s लुक तैयार कर लिया होगा। क्योंकि ये है ही इतना मजेदार- आम लोग तो छोड़िए स्टार और बड़े बड़े नेता भी इसे फोलो कर रहे हैं। इसी तरह आए दिन AI के जरिए कई तरह के फोटो वीडियो बनाए जा रहे हैं, लेकिन क्या आपने ये सोचा कि ट्रेंड के चक्कर और AI का इस तरह से इस्तेमाल करने पर आपकी प्राइवेसी या और किसी तरह का कोई नुकसान तो नहीं हो रहा। हो सकता है अब तक आपने इस बारे में न सोचा हो लेकिन चलिए अब हम बतातें हैं कि AI पर किसी को फोलो करने में हम कितनी बड़ी गलती कर रहे हैं।

इस बारे में बेहद कम लोग ही जानते हैं कि एक बार जब आप कोई फोटो इंटरनेट के AI जनरेटर पर अपलोड कर देते हैं, तो उस पर आपका कोई अधिकार नहीं रह जाता। सिस्टम आपकी फोटो से आपकी लोकेशन और पर्सनल जानकारी चुरा सकता है। एआई सिस्टम आप जो टाइप कर रहे हैं या अपलोड कर रहे हैं वो जानकारी तो सेव करेगा ही, लेकिन इसके अलावा सिस्टम आपके बारे में कई अन्य चीजें भी निकाल लेता है। इसमें आपके आईपी एड्रेस, डिवाइस का प्रकार और बाद में सेव होने वाली फाइलें या प्रतिक्रियाएं भी शामिल हैं। सीधे शब्दों में कहें तो किसी ट्रेंड के लिए एक तस्वीर अपलोड करके, आप असल में अपनी बहुत सारी निजी जानकारी शेयर कर रहे हैं।

वहीं आपकी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का खतरना बढ़ जाता है। चेहरे की साफ तस्वीर का इस्तेमाल डीपफेक, नकली प्रोफाइल और भ्रामक वीडियो बनाने में किया जा सकता है। तस्वीर को दूसरे व्यक्ति के चेहरे के साथ मिलाकर ऐसा वीडियो भी बनाया जा सकता है, जिससे असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो। यही नहीं अपराधिक मानसिकता वालो लोग तस्वीरों से चेहरे का डिजिटल मॉडल तैयार कर फर्जी अकाउंट और कंटेंट बना सकते हैं। आपकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा सकती है।

वहीं दूसरी ओर ai का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल जल संकट भी बढ़ा सकता है। एआई की मदद से कोई फोटो बनाने में सेकेंड भर का समय लगता है, लेकिन इसके पीछे बड़े-बड़े डेटा सेंटर में मौजूद शक्तिशाली जीपीयू (GPUs) और दूसरे कम्प्यूटिंग सिस्टम काम करते हैं। इन सिस्टम को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। जब लाखों लोग वायरल ट्रेंड में शामिल होने के लिए एक फोटो के कई वर्जन बनाते हैं, तो बिजली की खपत कई गुना बढ़ जाती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक दुनिया भर के एआई डेटा सेंटर लगभग 945 टेरावॉट-आवर बिजली सोख लेंगे। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया की कुल सालाना बिजली खपत का लगभग तीन गुना है। यह इतनी बिजली है जितनी पूरे जापान देश में एक साल में खर्च होती है। एक आम भारतीय घर साल भर में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उतनी ऊर्जा एआई सर्वर कुछ ही सेकंड्स में खत्म कर देते हैं।

यही नहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को चलाने वाले बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स और सर्वर को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, ऐसे में जल संसाधनों पर दबाव काफी अधिक बढ़ सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक एआई डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खर्च कर सकते हैं। यह अफ्रीका के 1.3 अरब लोगों की साल भर की घरेलू पानी की जरूरत के बराबर है। एक तरफ इंसान पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ मशीनें पानी की तरह पानी बहा रही हैं। हमें यहां समझना होगा कि समस्या किसी एक एआई फोटो में नहीं है, लेकिन जब भी कोई ट्रेंड आता है, तो बड़े पैमाने पर बिना वजह के लाखों की संख्या में जेनेरेशन होते हैं और समस्या यहीं से शुरु होती है। अगर कोई व्यक्ति एक तस्वीर बनाता है तो उसका प्रभाव सीमित होता है, लेकिन जब करोड़ों लोग सिर्फ ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए एक ही फोटो के 10-20 वर्जन बनाते हैं, तो उसका प्रभाव बहुत बड़े पैमाने पर पड़ता है, तो कुल मिलाकर ai का बहुत ज्यादा इस्तेमाल न केवल आपरी प्राइवेसी को खतरे में डालता है बल्कि इससे हमारे भविष्य में बिजली पानी पर भी संकट है।

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